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जहर देता हैं कोई कोई दवा देता हैं जो भी मिलता हैं मेरा दर्द बढ़ा देता हैं
रातों में खूब बातें होतीं हैं खुद से कौन कहता है अकेला हूँ मैं
वो छोड़ के गए हमें,न जाने उनकी क्या मजबूरी थी,खुदा ने कहा इसमें उनका कोई कसूर नहीं,ये कहानी तो मैंने लिखी ही अधूरी थी
आने वाला कल अच्छा होगा,बस इसी सोच मे आज बीत जाता है
उससे बात हुए अब काफी वक्त गुजर चुका है अब तो लगता है जी जाएंगे उसके बगैर भी हम
इतना दर्द तो मौत भी नही देती,जितनी दर्द तेरी ख़ामोशी दे रही है
शाम होते ही सज जाता है तेरी याद का बाजार,बस इसी रौनक से हमारी सारी रात गुजर जाती है
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हंसकर कबूल क्या करली सजाएं हमने,हम पर इल्जाम लगाने का दस्तूर बना दिया इस जमाने ने
जाने कैसी नजर लगी ज़माने की ,अब वजह मिलती नही मुस्कुराने की
ऐसा नहीं था की दिल में तेरी तस्वीर नहीं थी,बस इतना समझ लो की हाथो में तेरे नाम की लकीर नहीं थी
दिल से खेलना तो हमे भी आता है लेकिन जिस खैल मे खिलौना टुट जाए वो खेल हमे पसंद नही
चले जाएगे चुप-चाप एक दिन तेरी दुनिया से,प्यार की कदर करना किसे कहते है ये तुजे वक़्त सीखा देगा
सुना है काफी पढ़ लिख गए हो तुम कभी वो भी तो पढ़ो जो हम कह नहीं पाते
इस दुनिया के सभी लोग आपके लिए अच्छे हैं,बस शर्त ये है कि आपके दिन अच्छे होने चाहिए
तुम्हे क्या पता, किस दर्द मे हूँ मैं जो लिया नही,उस कर्ज मे हूँ मैं
न जाने हर बार ऐसा ही क्यों होता है,जो सबको ख़ुशी देता है आखिर में वही रोता है
लोग बदलते नहीं है बस उनकी ज़िन्दगी में आपसे कोई बेहतर आ जाता है
उसे किस्मत समझ कर सीने से लगाया था,भूल गए थे के किस्मत बदलते देर नहीं लगती
मुझे सिर्फ इतना बता दो इंतज़ार करू तुम्हारा या बदल जाऊ तुम्हारी तरह
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कौन कहता है उसकी याद से बेखबर हूँ मैं,मेरी आंखो से पूछ ले मेरी रात कैसे गुजरती है
दिए हैं ज़ख़्म तो मरहम का तकल्लुफ न करो,थोड़ा सा तो रहने दो, मुझ पर एहसान अपना
शायद कोई तो कर रहा है मेरी कमी पूरी तब ही तो मेरी याद तुम्हे अब नहीं आती
जो ढूंढ रहे थे हमें भुला देने का रास्ता,हमने खफा होकर उनका काम आसान कर दिया
तेरे चले जाने के बाद इतने गम मिले की तेरे जाने का गम भी याद ना रहा
अच्छी भली ज़िन्दगी गुजर रही थी फिर एक दिन वो किसी और की हो गई
जख्म कहां-कहां से मिले छोड़ इन बातों को जिंदगी तू यह बता सफर कितना बाकी
नहीं लगाऊँगा अब कोई पहरा दिल पर है झूठी ये दुनिया और लोग है लुटेरे
रिश्तों की तस्वीरों को जो साफ किया तो जाना कुछ चेहरों के रंग उड़ चुके हैं
रुलाना छोड दे ऐ जिंदगी तू हमे,हम खफा हुए तो,एक दिन तुझे छोड़ देंगे
फिर मिलेंगे बिछड़ कर तुमसे यही यकीन मैं रखता था था तो ख्वाब मगर और हसीन भी लगता था
कोई बनता ही नही मेरा,तुम अपनी ही मिसाल ले लो
कभी सोचा करता था कैसे रह पाऊँगा तेरे बिना देख तूने ये भी सिखा दिया मुझे
साँसों का रूठ जाना आम बात है, पर जान तब निकलती है जब अपने रूठ जाते है
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जिंदगी में अक्सर ये होता है जो दूसरों के लिए रोता है आखिर में उसके लिए कोई नहीं रोता
दर्द बनकर ही रह जाओ हमारे साथ,सुना है दर्द बहुत वक़्त तक साथ रहता है
कई दिनों से कोई नया ज़ख्म ना दिया पता करो मेरे अपने सब ठीक तो है ना
वाह मेरे महबूब बड़ी जल्दी ख्याल आया मेरा बस भी करो चूमना अब उठने भी दो जनाज़ा मेरा
आया था एक शख्स मेरा दर्द बाँटने रुखसत हुआ तो अपना भी गम दे गया मुझे
मैं फिर से निकलूंगा तलाश -ए-जिन्दगी में दुआ करना इस बार किसी से इश्क ना हो
वो सुना रहे थे अपनी वफाओं के किस्से हम पर नज़र पड़ी तो खामोश हो गए
तोड़ दो हमें भुलाने की कसम जो खाई है,कभी-कभी हमे याद कर लेने में क्या बुराई है
सीखा दिया दुनिया ने मुझे अपनों पर भी शक करना वरना मेरी फितरत में तो गैरो पर भी भरोसा करना था
कभी टूटकर बिखरो तो मेरे पास आ जाना,मुझे अपने जैसे लोग बहुत पसंद है
गुनाह तो बहुत किये ज़िन्दगी में पर सज़ा वहाँ मिली जहाँ बेक़सूर थे हम
मुझसे मौत ने पुछा मै आंऊगीं तो कैसे स्वागत करोगे? कहा मैने फूल बिछा कर पूछूंगा इतनी देर कैसे लगी
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युं तो गलत नही होते अंदाज चहेरों के लेकिन लोग वैसे भी नहीं होते जैसे नजर आते है
जरूरी नहीं कि सारे सबक किताबों से ही सीखे कुछ सबक जिन्दगी और रिश्ते सिखा देते हैं
कभी नहीं रुलाते अपने हमें रुलाते तो वो हैं जिन्हे हम अपने समझकर गलती कर देते हैं
कैसे मोहब्बत करूं बहुत गरीब हूँ साहब,लोग बिकते हैं और मैं खरीद नहीं पाता
ए खुदा क्या चीज मोहब्बत तू ने बनाईं हैं किसी को ये मिल जाती है और कोई सहता उम्र भर की तन्हाई हैं
किसी दिन तुम्हारी याद ना आये तो मुझे मतलबी ना समझ लेना दोस्तों क्या करूँ इस छोटी से उम्र में परेशानी बहुत है
एक दिन वह रो-रो कर कहने लगी मुझे तुमसे नफरत है लेकिन अगर उसको मुझसे नफरत थी तो वह रोई क्यों
टपक पड़ते हैँ आँसू जब किसी की याद आती है ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीँ होता
उसके दिल पर भी,क्या खूब गुज़री होगी,जिसने इस दर्द का नाम,मोहब्बत रखा होगा
सपना है आँखों में मगर नींद नहीं है दिल तो है जिस्म में मगर धड़कन नहीं है कैसे बयाँ करें हम अपना हाल-ए-दिल जी तो रहें हैं मगर ये ज़िंदगी नहीं है
कर देना माफ़ अगर दुखाया हो दिल तुम्हारा क्या पता कफ़न में लिपटा मिले कल ये यार तुम्हारा
दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन
उदास कर देती है हर रोज़ ये शाम ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई धीरे धीरे
वो कहतें हैं बहुत मजबूरियाँ हैं वक़्त की वो साफ़ लफ़्ज़ों में ख़ुद को बेवफ़ा नहीं कहते
एहसान किसी का वो रखते नहीं मेरा भी चुका दिया जितना खाया था नमक मेरा मेरे जख्मों पर लगा दिया
हैरान हूँ मैं तुम्हारी हसरतो पर तुमने सब कुछ माँगा मुझसे बस मुझे छोड़ कर
रोज एक नयी तकलीफ रोज एक नया गम न जाने कब एलान होगा की मर गए है हम
बदला हुआ वक़्त है ज़ालिम ज़माना है यहां मतलबी रिश्ते है फिर भी निभाना है
खफा रहने का शौक भी पूरा कर लो तुम लगता है तुम्हे हम ज़िंदा अच्छे नहीं लगते
हमने तो एक ही शख्स पर चाहत ख़त्म कर दी,अब मोहब्ब्बत किसे कहते है मालूम नहीं
ये उदास शाम और तेरी ज़ालिम याद भगवान खैर करे अभी तो रात बाकि है
बड़ा गजब किरदार है मोहब्बत का अधूरी हो सकती है मगर खत्म नहीं
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इन्सान अपनी मर्जी से खामोश नहीं होता किसी ने बहुत सताया हुआ होता है
ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं और बयां हमसे होगी नहीं
कई बार सोचता हूँ कि तुझसे सवाल करूँ फिर ख्याल आता है कि किस हक से
मेरी आँखों में छुपी उदासी को महसूस तो कर हम वह हैं जो सब को हंसा कर रात भर रोते हैं
फ़रियाद कर रही है तरसती हुई निगाहें देखे हुए किसी को ज़माना गुजर गया
कितना खुशनुमा होगा वो मेरे इँतज़ार का मंजर भी जब ठुकराने वाले मुझे फिर से पाने के लिये आँसु बहाएगा
तय है बदलना हर चीज बदलती है इस जहाँ में किसी का दिल बदल गया,किसी के दिन बदल गए
न रुकी वक़्त की गर्दिश और न ज़माना बदला पेड़ सुखा तो परीन्दो ने ठिकाना बदला
आज रास्ते में कुछ प्यार भरे पन्ने टुकड़ो में मिले शायद फिर किसी गरीब की मोहब्बत का तमाशा हो गया
मोहब्बत पाने की कोई राह नहीं ये तो उसे मिलती है जिसे इसकी कदर नहीं होती
तुम्हें अपना कहने की तमन्ना थी दिल में लबों तक आते आते तुम ग़ैर हो गए
मुस्कुराने की हिम्मत नहीं अब मुझमें टूट-कर तुझे चाहने का मन करता है
ऐ ज़िंदगी काश तू ही रूठ जाती मुझ से ये रूठे हुए लोग मुझ से मनाये नहीं जाते
जो नसीब में नहीं होता वो रोने से भी नहीं मिलता
मैं तो इतना सरल हूँ कि सब को समझ आ जाता हूँ,शायद तुमने ही पन्ने छोड़ छोड़ कर पढ़ा है मुझे
बाज़ार बड़ा मंदा है साहेब ख़ुशी की किल्लत है और ग़म कोई ख़रीद नहीं रहा
बुरा कैसे बन गया में दर्द लिखता हुँ किसी को देता तो नही
सुख मेरा,काँच सा था ना जाने कितनों को चुभ गया
दिल चाहता है आज रो लूँ मैं जी भर के ना जाने किस-किस बात पर उदास हूँ
रोज़ रोज़ जलते हैं फिर भी खाक़ न हुए अजीब हैं कुछ ख़्वाब भी बुझ कर भी राख़ न हुए
तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है पर चाँद का दर्द वो रात नही समझती
इतनी ठोकरें देने के लिए शुक्रिया ज़िन्दगी चलना तो नहीं सीखा मगर सम्भलने का हुनर तो आ गया
पत्थर की दुनिया जज़्बात नही समझती दिल में क्या है वो बात नही समझती
किस्मत के तराज़ू में तोलो तो फ़कीर हैं हम और दर्द-ए-दिल में हम सा कोई नहीं
पेश किया दर्द-ए-दिल हमने नगमों मे उसे भी वो सिर्फ “शेर” समझ बैठे
नासमझ तो वो ना थे इतना के प्यार को हमारे समझ ना सके
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हम बने थे तबाह होने को आपका इश्क़ तो बहाना था
महफ़िल में गले मिल के वो धीरे से कह गए ये दुनिया की रस्म है इसे मोहब्बत ना समझ लेना
नजरे बिछाकर मै तुम्हें यूँ हीं देखती रहुँ जो दर्द छुपा रहे हो वो मै सहती रहुँ
छूट गया हाथों से वो मेरे कुछ इस कदर रेत फिसलती है जैसे बन्द मुट्ठी से
वजह पूछने का मौका ही नहीं मिला वक़त गुज़रता गया और हम अजनबी बनते गए
बहुत अंदर तक तबाही मचाता है वो आँसू जो आँख से बह नहीं पाता
माना तुम लफ़्हज़ों के बादशाह हो पर हम भी ख़ामोशियों पर राज़ करते हैं
जब नाराज़गी अपनों से हो तो ख़ामोशी ही भली,अब हर बात पर जंग हो ये ज़रूरी नहीं
कोई उनसे पूछे जो गमों से भागते है वो कहाँ पनाह लेंगे जिनको ख़ुशी रास ना आई
रिश्तों का नाम हो ये ज़रूरी नहीं कुछ बेनाम रिश्ते रुकी हुई ज़िन्दगी को साँसे दे जाते हैं
बहुत तेज़ रफ़्तार से चल रही है ज़िन्दगी समझ नहीं पा रहा हूँ ये पड़ाव है या मंज़िल मेरी
रूठती हमेशा खुशियाँ ही है दुखों के कहाँ इतने नखरे होते हैं
वो सारी अधूरी हसरतें ज़िन्दगी की आती है कभी कभी आज भी हिसाब करने
दिल्लगी कर ज़िन्दगी से,दिल लगा कर चल ज़िन्दगी है थोड़ी,थोड़ा मुस्कुरा के चल
वज़न तो सिर्फ हमारी इच्छाओं का है,बाकी ज़िन्दगी बिलकुल हलकी फुलकी है
परखो तो कोई अपना नही समझो तो कोई पराया नहीं
सच्चे इंसान को झूठे इंसान से अक्सर ज्यादा सफाई देनी पड़ती है
इंसान की चाहत है कि उड़ने को पर मिले और परिंदे सोचते है कि रहने को घर मिले
तूफ़ान आना भी ज़रूरी होता है ज़िन्दगी में तभी पता चलता है कौन हाथ पकड़ता है और कौन साथ छोड़ जाता है
एक बार फिर सुलह हुई हैं ज़िन्दगी से पर एक शर्त पर उसने कहा है कि तू अब दिल की नहीं दिमाग की सुनेगा
तुम्हारी यादों से है ज़िन्दगी में रौनक इसलिए अपनी नहीं तुम्हारी ज़िन्दगी की दुआ करते हैं
मिलता तो बहुत कुछ है ज़िन्दगी में पर हम गिनती उसी की करते है जो हासिल ना हो सका
पूरी उम्र सीख ना सके जो किताबें पढ़ कर करीब से कुछ चेहरे पढ़े तो ना जाने कितने सबक सीख लिए
नादान लोग ही जीवन का मज़ा लेते हैं समझदारों को तो हमने हमेशा मुश्किलों में ही देखा है
जनाजों में भीड़ ऐसे ही नहीं होती हर इंसान अच्छा है बस इस दुनिया से चले जाने के बाद
जिंदगी में जो चाहो हासिल कर लो,बस इतना ख्याल रखना कि आप की मंजिल का रास्ता लोगो के दिलों को तोड़ता हुआ न गुजरे
जिंदगी की भागदौड़ के बीच में से छोटी छोटी खुशियां चुराना सीखना चाहता हूं
दुनिया की सबसे खतरनाक नदी है भावना सब बह जाते है इसमें
बिना किताबों की जो पढ़ाई सीखी जाती हैं उसे जिंदगी कहते हैं
लड़ना चाहता हूँ अपनों से,पर डरता हूँ कि कहीं जीत गया तो हार जाऊंगा
कुम्भकरण के बाद अगर कोई ढ़ंग से सोया है तो वो है मेरी किस्मत
वक़्त पर भी छोड़ देने चाहिए कुछ उलझनों के हल,बेशक जवाब देर से मिलेगे पर लाजवाब मिलेंगे
तुम जलन बरकरार रखना,हम जलवे बरकरार रखेंगे
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अपनी जिंदगी से हमने कभी उधार न लिया,कफ़न भी लेंगे तो हम अपनी जिंदगी दे कर
ले दे के अपने पास फ़क़त एक नजर तो है,क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नजर से हम
नफरत सी होने लगी है इस सफ़र से अब,ज़िंदगी कहीं तो पहुँचा दे खत्म होने से पहले
ज़िंदगी जिसका बड़ा नाम सुना है हमने,एक कमजोर सी हिचकी के सिवा कुछ भी नहीं
हर बात मानी है तेरी सिर झुका कर ऐ ज़िंदगी,हिसाब बराबर कर तू भी तो कुछ शर्तें मान मेरी
अब समझ लेता हूँ मीठे लफ़्ज़ों की कड़वाहट,हो गया है ज़िंदगी का तजुर्बा थोड़ा थोड़ा
मुझे ज़िंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं है पर लोग कहते हैं यहाँ सादगी से कटती नहीं
मंजिलें मुझे छोड़ गयी रास्तों ने संभाल लिया,जिंदगी तेरी जरूरत नहीं मुझे हादसों ने पाल लिया
कभी खोले तो कभी ज़ुल्फ़ को बिखराए है,ज़िंदगी शाम है और शाम ढली जाए है
पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं,तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं
है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफर रहा न क़याम है कहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बदमिजाज़ सी शाम है
देखा है ज़िंदगी को कुछ इतना करीब से,चेहरे तमाम लगने लगे हैं अब तो अजीब से
ज़िन्दगी से पूछिये ये क्या चाहती है,बस एक आपकी वफ़ा चाहती है,कितनी मासूम और नादान है ये,खुद बेवफा है और वफ़ा चाहती है
शतरंज खेल रही है मेरी जिंदगी कुछ इस तरह,कभी तेरी मोहब्बत मात देती है कभी मेरी किस्मत
जो लम्हा साथ है उसे जी भर के जी लेना,ये कम्बख्त जिंदगी भरोसे के काबिल नहीं है
अब तो अपनी तबियत भी जुदा लगती है,सांस लेता हूँ तो ज़ख्मों को हवा लगती है,कभी राजी तो कभी मुझसे खफा लगती है,जिंदगी तू ही बता तू मेरी क्या लगती है
ज़िन्दगी हर पल ढलती है,जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है,शिकवे कितने भी हो किसी से,फिर भी मुस्कराते रहना,क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी है,बस एक ही बार मिलती है
मुझ से नाराज़ है तो छोड़ दे तन्हा मुझको ऐ ज़िंदगी मुझे रोज-रोज तमाशा न बनाया कर
फुर्सत मिले जब भी तो रंजिशे भुला देना,कौन जाने साँसों की मोहलतें कहाँ तक हैं
पढ़ने वालों की कमी हो गयी है आज इस ज़माने में वरना मेरी ज़िन्दगी का हर पन्ना पूरी किताब है_
ज़िंदगी भी तवायफ की तरह होती है,कभी मजबूरी में नाचती है कभी मशहूरी में
इतनी बदसलूकी ना कर ऐ ज़िंदगी,हम कौन सा यहाँ बार-बार आने वाले हैं
परेशान हूँ मैं और दर्द का है नाम ज़िंदगी अच्छा या बुरा मैं हूँ पर बदनाम ज़िंदगी
अकेली रातें,मायूसी,आंसू,लाचारी,तन्हाई,मोहब्बत दे या कर मौत का इंतेज़ाम ज़िंदगी
ग़ैरों से पूछती है तरीका निज़ात का अपनों की साजिशों से परेशान ज़िंदगी
थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी,मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे
जब मिलोगे किसी और से तो जान जाओगे,अगर अच्छे नहीं थे तो बुरे भी नहीं थे हम
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
जिनके दिल बहुत अच्छे होते हैं अक्सर उन्हीं की किस्मत खराब होती है
मत किया कर ऐ दिल किसी से इतनी मोहब्बत,जो लोग बात नहीं करते वो प्यार क्या करेंगे
सच्चा प्यार सिर्फ वो लोग कर सकते हैं जो किसी का प्यार पाने के लिए तरस चुके हो
बहुत शोक था दुसरो को खुश रखने का होश तब आया जब खुद को अकेला पाया
वो जा रहा है छोड़ कर बताओ रास्ता दूँ या वास्ता दूँ
जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं
दिल पर लग जाती है उन्हें अक्सर हमारी बातें जो कहते थे तुम कुछ भी बोलो बुरा नहीं लगता
एक थी समझने वाली मुझे अब वो भी समझदार हो गयी है
मेरे मरने पर किसी को ज्यादा फर्क नहीं होगा बस तन्हाई रोएगी कि मेरा हमसफ़र चला गया
शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था
मुझे हँसता हुआ देखा तो परेशान सा लगा वह तो रिस्ते हुये जख्म देखने आया था मेरे
बहुत जल्दी भरोसा कर रहे हो कभी पहले टूटा नहीं क्या
दिल में आने का रास्ता तो होता है लेकिन जाने का नहीं इसलिए जब कोई दिल से जाता है तो दिल तोड़कर ही जाता है
कुछ पल निकाल लिया करो मेरे लिए भी,दिल बहुत उदास रहता है जब तुमसे बात नहीं होती
ग़म इस बात का नहीं की आप मिल न सकेंगे दर्द इस बात का है की हम आपको भुला न सकेंगे
पास आकर सभी दूर चले जाते हैं हम अकेले थे अकेले ही रह जाते हैं दिल का दर्द किसे दिखाएं मरहम लगाने वाले ही जख्म दे जाते हैं
दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे
हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो,हमारा शहर तो यूँ ही बिच में आया था
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हमे देखकर अनदेखा कर दिया उसने बंद आंखों से पहचानने का कभी दावा किया था जिसने
कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था
कल जितनी हसरत थी तुझे पाने की आज उतनी हसरत है तुझे भूल जाने की
मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है
ज़िन्दगी ने तो एक बात सीखा दी की हम किसी के लिए हमेशा खास नहीं रह सकते
मेरे मरने पर तो लाखो रोने वाले है तलाश उसकी है जो मेरे रोने से मर जाए
सिलसिला आज भी वही जारी है तेरी याद मेरी नींदों पर भारी है
किस मुकाम पर ले आई है ये मोहब्बत हमे उसे पाया भी नहीं जाता और भुलाया भी नहीं जाता
जब कोई आपकी नाराज़गी की फ़िक्र करना छोड़ दे तो समझ लेना रिश्ता ख़तम मजबूरी शुरू
दिल को कागज समझ रखा है क्या आते हो जलाते हो चले जाते हो
खुद पर भरोसा करना सिख़लो सहारा चाहे कितना ही सच्चा हो एक ना एक दिन साथ छोड़ ही देता हैं
बुरा वक़्त दर्द नहीं देता बुरे वक़्त में साथ छोड़ने वाले दर्द देते है
कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा,एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता
मैं भी तलाश में हूँ अब किसी अपने की कोई आप सा तो हो लेकिन किसी और का ना हो
जिंदगी रुलाती है मगर रोने का नहीं
नमक की तरह हो गयी है जिंदगी लोग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं
कदर करना सिख लो क्योंकि ना ही ज़िंदगी वापिस आती है और ना ही लोग
उसकी मेरी दोस्ती थी तो कमाल की,पर नाम दे के उसने सब बर्बाद कर दिया
पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ
मेरी आंखे देखकर लोग कहते हैं लगता है तेरा चाहने वाला तुझे आजमाता बहुत है
बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है
दर्द सहते सहते इंसान सिर्फ हसना नहीं रोना भी छोड़ देता है
बहुत देर करदी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने मे वोह दिल निलाम हो गया जिस पर कभी हकुमत तुम्हरी थी
क़दर करना सीख लो कहीं कोई थक ही न जाये तुम्हें एहसास दिलाते दिलाते
मै उसके लिए चाय बनाना सीखता रहा और वो पैग बनाने वाले के साथ भाग गई
दिल में रहते हैं कुछ लोग जिनका नाम ज़ुबान से लेना ठीक नहीं होता
जिंदगी मै सिर्फ़ दो ही नशा करना जीने के लिए यार और मरने के लीये प्यार
तुमसे अच्छे मेरे दुश्मन निकले हर बात पे कहते है तुझे नहीं छोड़ेगे







































































































































































































